ऐन फ्रैंक के डायरी के पन्ने ॅ
बुधवार, 29 मार्च, 1944 मेरी प्यारी किट्टी.
कैबिनेट मंत्री मिस्टर बोल्के स्टीन ने लंदन से डच प्रसारण में कहा कि युद्ध के बाद युद्ध का वर्णन करने वाली डायरियों और पत्रों का संग्रह किया जाएगा। और फिर हर कोई मेरी डायरी पर झपट पड़ा। सोचों, ये कितना दिलचस्प होगा जब मैं इस गुप्त एनेक्सी के बारे में छपवाऊँगी। उसका शीर्षक ही ऐसा होगा कि
की चालाकियों की जर्मनों को हवा भी न लगे।
लोग इसे एक जासूसी कहानी समझेंगे। मैं सही बता रही हूँ, युद्ध के दस साल बाद लोग इससे कितना चकित होंगे कि जब उन्हें पता चलेगा कि हम लोग कैसे रहते थे, हम क्या खाते थे और यहूदियों के रूप में अज्ञातवास में हम क्या क्या बातें करते थे। हालाँकि मैं तुम्हें इस जीवन के बारे में काफ़ी कुछ बता चुकी हूँ, फिर भी तुम अभी भी थोड़ा-सा ही - जान पाई हो । हवाई हमले के दौरान औरतें कैसी डर जाती हैं; अब देखो ना पिछले रविवार जब 350 ब्रिटिश वायुयानों ने इज्मुईडेन पर 550 टन गोला-बारूद बरसाया तो हमारे घर ऐसे काँप रहे थे जैसे हवा में घास की पत्तियाँ या हमारे इन घरों में कैसी महामारियाँ फैली हुई हैं।
तुम्हें इस सबकी कुछ खबर नहीं है। सब कुछ तुम्हें बताने में पूरा दिन लग जाएगा। लोगों को सब्जियों और सभी प्रकार के सामानों के लिए लाइनों में खड़े होना पड़ता है; डॉक्टर अपने मरीजों को नहीं देख पाते, क्योंकि उन्होंने पीठ मोड़ी नहीं कि उनकी कारें और मोटर साइकिलें चुरा ली जाती हैं, चोरी-चकारी इतनी बढ़ गई है कि डच लोगों में अँगूठी पहनने का रिवाज तक नहीं रह गया है।
छोटे-छोटे बच्चे आठ-आठ दस-दस बरस के होंगे लेकिन लोगों के घरों की खिड़कियाँ तोड़ कर घुस जाते हैं और जो भी हाथ लगा, उठा ले जाते हैं। लोग पाँच मिनट के लिए भी अपना घर छोड़ने की हिम्मत नहीं कर सकते हैं, क्योंकि लौटने पर उन्हें घर में झाडू फिरी मिलेगी। चोरी गए टाइपराइटरों, ईरानी कालीनों बिजली से चलने वाली घड़ियों, कपड़ों आदि को लौटाने के लिए अखबारों में इनाम के विज्ञापन आए दिन पढ़ने को मिलते हैं। गली-गली नुक्कड़ों पर लगी बिजली से चलने वाली घड़ियाँ लोग उतार ले गए और सार्वजनिक टेलीफ़ोनों का पुर्जा पुर्जा गायब हो चुका है।
डचों की नैतिकता अच्छी नहीं है। सब भूखे हैं; नकली कॉफ़ी को छोड़ दो तो एक हफ्ते का राशन दो दिन भी नहीं चल पाता। अभी और क्या देखना बाकी है, पुरुषों को जर्मनी भेजा जा रहा है, बच्चे बीमार हैं या फिर भूख से बेहाल हैं; सब लोग फटे-पुराने कपड़े और घिसे-पिटे जूते पहनकर काम चला रहे हैं। ब्लैक मार्केट में जूते का नया तला 7.50 गिल्डर का मिलता है। इसके अलावा बहुत कम मोची मरम्मत का काम कर रहे हैं, यदि वे करते भी हैं तो चार महीने इंतजार करना पड़ेगा और इस बीच जूता गायब हो चुका होगा।
इसका एक लाभ भी हुआ है, खाना जितना खराब होता जा रहा है बिक्री उतनी ही गंभीर हो रही है; सरकारी लोगों पर हमले की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। खाद्य कार्यालय, पुलिस, अधिकारी- सभी या तो अपने साथी नागरिकों की मदद कर रहे हैं या उन पर कोई आरोप लगाकर जेल में भेज देते हैं। सौभाग्य से बहुत कम डच लोग गलत पक्ष में हैं।
तुम्हारी ऐन